वो इश्क जो अधूरा था - भाग 22

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अनुराधा की आवाज़ टेप रिकॉर्डर में गूंज रही थी -"तारीख सत्रह अगस्त उन्नीस सौ निन्यानवे । हवेली में आते ही कुछ बदल गया है। फरज़ाना की उपस्थिति हर जगह महसूस होती है। रुख़साना की आत्मा शांत है, जैसे इंतज़ार में हो — लेकिन फरज़ाना... उसके अंदर एक अजीब विद्रोह है। मैं समझती थी, आत्माओं को तर्क से समझा जा सकता है। पर ये आत्मा... सवाल नहीं सुनती, सिर्फ़ अपने जवाब दोहराती है।”डॉक्टर अनवर और अनुराधा ने हवेली की छत के उस हिस्से में एक छोटी सी पूजा की थी, जहाँ पुराने जमाने की टाइल्स अब भी खून के निशानों से धुंधली