में और मेरे अहसास - 122

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मेरे अपने मेरे होने की निशानी मांगे l मुझ में मेरी ही तस्वीर पुरानी मांगे ll   फ़िर से वो बाँकपन के दिन जीने को l डायरी में बचपन की कहानी मांगे ll   नटखट,मजेदार औ मासूम से सभी l बचपन के संगी साथी जवानी मांगे ll   कहां बिताएँ शाम कहां गुजाएँ रात l जवानी के दिन रात कमाली मांगे ll   चार लम्हे खुशी से जीया हुआ देख l  मेरे दिनों का हिसाब समाजी मांगे ll १-३-२०२५    प्रीत के बंधन की परछाइयाँ ताउम्र साथ चलती हैं l रूठने मनाने की हरजाईयाँ ताउम्र साथ चलती हैं ll