मेरे अपने मेरे होने की निशानी मांगे l मुझ में मेरी ही तस्वीर पुरानी मांगे ll फ़िर से वो बाँकपन के दिन जीने को l डायरी में बचपन की कहानी मांगे ll नटखट,मजेदार औ मासूम से सभी l बचपन के संगी साथी जवानी मांगे ll कहां बिताएँ शाम कहां गुजाएँ रात l जवानी के दिन रात कमाली मांगे ll चार लम्हे खुशी से जीया हुआ देख l मेरे दिनों का हिसाब समाजी मांगे ll १-३-२०२५ प्रीत के बंधन की परछाइयाँ ताउम्र साथ चलती हैं l रूठने मनाने की हरजाईयाँ ताउम्र साथ चलती हैं ll