लिपस्टिक

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यह प्राय हर दिन ही होता था गर्वित अपने दफ्तर के लिए निकलता तो लगभग उसी समय बस स्टैंड पर वो आती थी ! बस स्टैंड पर मौजूद सभी एक बार तो उसकी तरफ देख ही लेते थे, देखें भी क्यों ना, लगता था जैसे कोई शापित अप्सरा हो और इस मर्त्यलोक भूलोक में विचरण कर रही हो ! गर्वित का मन भी उस से बात करने का होता ही था किन्तु बात कैसे शुरू करे समझ नहीं पा रहा था ! वो तो ना किसी की तरफ देखती थी और ना ही किसी से बात करती थी बस चुपचाप