अमाँ हामिद मियाँ!कहाँ चल दिए सुबह-सुबह,सिराज भाई ने पूछा... बस!सिराज भाई!खुदा के फ़ज़्ल से मुझे एक केस मिला है,खून का मुआमला है,इसलिए आज उस मुजरिम से मिलने जेल जा रहा हूँ,हामिद ने जवाब दिया.... खुदा खैर करे,हामिद मियाँ! कामयाबी तुम्हारे कदम चूमे,अल्लाहताला तुम्हें कामयाबी बख्शें,सिराज भाई बोले... शुक्रिया !सिराज भाई! मुझ यतीम को आपने इतने सालों सम्भाला,मेरा ख्याल रखा,कहने को तो आप मेरे चचाजान के बेटे हैं और मेरे चचेरे बड़े भाई,लेकिन आपने मेरा ख्याल वालिदैन की माफ़िक़ रखा है,आप का हाथ हमेशा मेरे सिर पर बना रहा,तभी तो आज मैं इस मुकाम पर हूँ,हामिद बोला... बस...बस..अब ज्यादा बातें बनाने