झूठी मज़ार के फूल

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झूठी मज़ार के फूल कहानी - शरोवन *** ‘हाथों में आई हुई अपने प्यार की जीती हुई बाज़ी इतनी चुपके से केवल आंख मार के सरक जायेगी, उसने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था। इस दुनियां का चलन उसके साथ चालबाज़ी करे, और अवसर हाथ आने पर अपने स्वार्थ के लिये कभी भी पीछे न हटे; इस राजनीति को चाहे एक बार दोष ना भी दिया जाये पर खुद इस दुनियां का बनानेवाला उसके हाथ की लकीरों को बनाकर फिर से मिटा दे, इस कटु सत्य पर उसे विश्वास सहज ही नहीं हो पा रहा था। जितनी सहजता