क्या जी!आप जब देखों तब कविताएं ही लिखा करतें हैं,कभी मेरा भी ख्याल कर लिया कीजिए?निगोड़ी आपकी ये कविताएं मेरी तो सौत बनी फिरतीं हैं,माया ने अपने पति लाभशंकर से कहा... तुम्हारा ख्याल ही तो हर वक्त रहता है तभी तो मैं इतनी सुन्दर-सुन्दर कविताओं की रचना कर पाता हूँ,लाभशंकर बोलें।। सच कहते हो जी!माया ने पूछा।। बिल्कुल सच!श्रीमती जी!हमें तो आपके बिना किसी और का ख्याल आता ही नहीं,हमारे ठहरे रसिक व्यक्ति ,सदैव आपके प्रेम में लिप्त रहने वाले,जहाँ फूल वहाँ भँवरें का होना एक वाजिब सी बात है,इसलिए हमारे भावों को जरा समझा कीजिए, श्रीमती जी!लाभशंकर जी बोलें।।