मृगछलना आसमान में हलके से बादल थे। श्वेत-धवल बादल। धूप में खूब गर्माहट थी लेकिन हवा सुरीली (ठंड़ी) थी। यह बसंत का मौसम था। सर्दी जा रहीं थी और गर्मी की पदचाप माहौल में गूँज रही थी। टैम्पो घरघराता हुआ परेश के एकदम पास से गुजरा तो वह चौंक गया। उसे लगा था कि किनारे पर बैठी लड़की वही है- वही यानी मधु। मधु के लिए ही तो वह जबलपुर आया है। मधु उसकी क्या लगती है ? यदि कोई उससे पूछे, तो वह टाल जाएगा। रिश्तों के कोष में ऐसा कोई उपयुक्त शब्द नहीं है जो उनके