लघुकथा दलदल " लगता है आज हमारी जान का मूड कुछ ठीक नहीं है !" " मूड क्या यार , घर - गृहस्थी में ही जिंदगी खप् रही है , मैं तो बोर हो गयी ." " कोई नई बात हुई है क्या ......जो इतनी उखड़ी - उखड़ी सी हो। ? " " नया क्या होना है . सुबह उठो , पति महोदय के लिए नाश्ता बनाओ , पैक करो . उन्हें आफिस भेजने के बाद बच्चों को तैयार करो . स्कूल के लिए चलता करो ......सबके विदा होने के बाद बिखरी हुई हर चीज को समेटो