स्वाभिमान - लघुकथा - 54

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नौकर के रूप में काम पाने आए युवक से नियोक्ता ने प्रश्न किया, ‘तुम्हारा नाम ?’ ‘दीनदयाल।’ ‘दीनदयाल यानी दीनू ?’ ‘दीनू नहीं, सर, दीनदयाल।’ ‘सर नहीं, मालिक बोलो। नौकरों की ज़ुबान पर एक यही शब्द ठीक जँचता है।’