स्वाभिमान - लघुकथा - 53

(4k)
  • 4.6k
  • 1
  • 1.5k

सुनो लड़के! जरा इस गार्डन की साफ़-सफाई कर दोगे? कितने पैसे लोगे?” बाहर गली में कबाड़ वाले लड़के की आवाज सुनकर रजनी बाहर आई.