स्वाभिमान - लघुकथा - 37

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प्रोफेसर नरेन्‍द्र शर्माजी गांव बडे भाई के पास गए तो वहां उनकी पुश्‍तैनी खेती बाड़ी और दुकान जोरों से चलते देख अत्‍यंत प्रभावित हुए। वैसे तो नरेन्‍द्रजी अपना हिस्‍सा पहले ही लेकर अलग हो चुके थे, पर फिर भी बड़े भाई ने उनका खूब आदर सत्‍कार किया, लौटते में उनके साथ ढेर सारा घर का घी, सब्जियां, अनाज आदि भी बांध दिया। अभिभूत नरेन्‍द्रजी ने कृतज्ञतावश भाई के बेटे सुयश को शहर साथ ले जाने का प्रस्‍ताव रखा