सोम को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सामान्य होने पर अथर्व ने जो बताया उसे सुन कर नीरज और शोभा के होश उड़ गए। वह अपने आप को दोष दे रहे थे कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कर अपना मासूम बच्चा उसे सौंप दिया। अथर्व के दिल पर एक गहरी चोट लगी थी। उसके मन पर लगे घावों को भरने के लिए नीरज और शोभा को बहुत धैर्य से काम लेना पड़ा। मनोचिकित्सक के साथ कई सेशन करने के बाद अथर्व कुछ सामान्य हो सका। धीरे धीरे उसने हंसना खेलना शुरू कर दिया। पर शोभा जानती थी कि सोम ने जो किया उसके निशान मिटाना आसान नहीं होगा।