दुसरे दिन जब नौ बजे विरजन प्रताप को भोजन करने के लिये बुलाता है तब प्रताप देखता है की चौका लगा हुआ है मिटटी की भीनी भीनी सुगंध आ रही है जैसे की यह मिटटी यहाँ ताज़ी ताज़ी ही लगाई गई हो वहां आसन स्वच्छता से बिछा हुआ था एक थाली में चावल और चपाती रक्खी हुई थी और दाल एवं तरकारियाँ अलग अलग कटोरियों में रक्खी हुई थी लोटा और गिलास पानी से भर कर एक और रक्ख दिये गये थे यह देख कर प्रताप सीधे ही मुंशी संजीवनलाल के पास गया और उन्हें सीधा चौके के सामने ला खड़ा कर दिया और मुंशीजी...