जैनब रोती हुई अपने पति के पैरों में गीर गई और बोली, स्वामी, धर्म बार बार मिलता है, ह्रदय केवल एक बार मैं सिर्फ आपकी हूं और सदा आप ही की रहूंगी, मगर ये समाज क्या ये सब स्वीकार करेगा?