कानून की दृष्टि में बेटा-बेटी को समानता प्राप्त होने के बावजूद आज भी समाज की सोच में पूर्ण परिवर्तन नहीं दिखाई पड़ता है । फौजी की बेटी एक यथार्थ घटना पर आधारित कहानी है जिसमें माँ के रूप में एक आदर्श स्त्री चरित्र प्रस्तुत है । ऐसी स्त्री-पात्र , जो अपनी भाभी के गर्भ से जन्मी एक नन्ही कन्या को बचाने हेतु अपने सारे पारिवारिक-सामाजिक संबंधों को तिलांजलि दे देती है । समय आने पर यही कन्या अपनी मां के सुख, सौभाग्य और समृद्धि का आधार बनकर मां के निर्णय को सही से करती है ।