अक्सर हर लेखक पाठक और प्रशंसा का भूखा होता है। वह लिखता ही इसलिए है कि कोई उसे पढ़े और पढ़कर उसके कौशल की प्रशंसा करे। मगर जब लाख कोशिशों के बाद भी कोई न पढ़े तो क्या हाल होता है