धधक (भाग-1) नादान लेखिका द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

धधक (भाग-1)

एक ऐसी लड़की की कहानी, जो अपनो के विश्वासघात से टूट चुकी है। लेकिन उसके मन मे इंतकाम की ज्वाला धधक रही है। वो किसी भी कीमत पर इन्तेक़ाम लेना चाहती है। एक लड़की, जिसने कभी गलत रास्ते को नही चुना.... हमेशा सिर्फ और सिर्फ सच का साथ दिया। अब वो बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थी। क्या वो अपने मकसद में कामयाब हो पाएगी??





तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो अमान?? जस्ट आंसर मी। हाऊ डेर यु। तुमने मुझे चीट किया। मुझेss.... आई एम नॉट हंसिका.... आई एम ज़ोया। तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी मुझे धोखा देकर। बहुत बहुत बड़ी गलती। जिसका हर्जाना तो तुम्हे और तुम्हारी उस सो कॉल्ड सेक्रेटरी जिया को भुगतना ही पड़ेगा। मैंने इस दुनिया मे सबसे ज्यादा तुम दोनो पर विश्वास किया था और तुम दोनो ने ही मेरी आँखों मे धूल झोंकी। सही कहते हैं दुनिया वाले....बाहर के लोग तो ठगते हैं, धोखा तो कोई अपना ही देता है। जिया, जो मेरे लिए मेरी जान से प्यारी बहन थी। जिसके लिए मैंने हमेशा अपनी खुशियों को ताक पर रख दिया और अमाल... मेरा प्यार। जिसके लिए मैंने अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा दी। तुम दोनो ने ही मेरे प्यार, परवाह, मासूमियत और विश्वास का फायदा उठाया। तुम दोनो.... जिसे मैंने अपना हमदम माना, अपना हमराज, हमदर्द समझा उसी ने मुझे इतना बड़ा दर्द, इतना बड़ा धोखा दे दिया। तुम दोनो को तो मैं बर्बाद करके रख दूँगी। याद रखना मेरे इन शब्दों को। अगर ज़ोया इतना बड़ा एम्पायर खड़ा कर सकती है तो उसे बर्बाद करने की ताकत भी रखती है। तुम दोनो ने चाहे धोखे से मुझसे सबकुछ छीन लिया हो....लेकिन याद रखना, मैं भी इस इंडस्ट्री की पुरानी शख्सियत हूँ। एक एक खेल खेला है मैंने यहां का। अगर तुमने मेरे साथ विश्वास घात करके मुझे अपनी ऊंचाइयों से धक्का देकर नीचे गिरा दिया इसका ये मतलब नही की मैं अपाहिज हो चुकी हूँ। सिर्फ चोट लगी है। लेकिन इस चोट का घाव में कभी भरने नही दूँगी। ये चोट मुझे तुम्हारे दिए धोखे की याद दिलाते रहेंगे। मुझे अपने मकसद में आगे बढ़ने में मदद करेंगे। मैं फिर से खड़ी होउंगी। फिर से अपना मकाम बनाउंगी। लेकिन इस बार पुरानी ज़ोया की तरह नही.... बल्कि एक नई ज़ोया बनकर। वओ ज़ोया जो अब घायल शेरनी है। जिसे सिर्फ और सिर्फ अपना बदला लेना है। जिसे वापस अपनी ऊंचाइयों को छूना है। और अपनी उसी ऊंचाइयों को छूने के लिए मैं वो पहले वही निश्छल और ईमानदार ज़ोया नही रही.... अब ये ज़ोया साम-दाम-दण्ड-भेद सब अपनाएगी तुम्हे बर्बाद करने के लिए। अपने उल्टे दिन गिनना स्टार्ट कर दो।" ज़ोया समुद्र किनारे बैठी-बैठी चीख रही थी। उसे उसके अपनो ने ही चला था। थोड़ी देर वो ऐसे ही टेसुएँ बहाती रही और फिर उसने अपने आंसू पोंछे और उठकर खड़ी हो गयी। सामने लहराता विशाल समुद्र.... उसकी आँखों में आये इन अश्को का गवाह था।
जब वो यहां आई थी तब एक टूटी हुई, रोती-बिलखती लड़की थी.... लेकिन अब वो एक घायल शेरनी बन चुकी थी। प्रतिशोध की आग में जलती एक घायल शेरनी।
उसने अपना मोबाइल निकाला और कुछ लोगो को फोन किया। कुछ ने तो उसका नम्बर देखकर कॉल रिसीव ही नही किया और जिन्होंने किया उन्होंने बहाना बनाकर उसकी मदद करने से किनारा कर लिया। ज़ोया के सीने में एक बार फिर अंगारे धधक उठे। एक समय पर ये सारे लोग उसके सामने सिर झुकाया करते थे। ये वो लोग थे, जिनके ज़ोया पर एक दो नही बल्कि कइयों एहसान थे।
लेकिन ज़ोया को इनके मदद की जरूरत आन पड़ी तो सब कन्नी काटकर निकल लिए।
लेकिन ज़ोया को उनसे कोई खास दुख नही हुआ... क्योंकि वे तो फिर भी बेगाने थे। असली दर्द तो उसके सबसे खास अपनो ने दिया था।
वो किसी तरह अपने घर तक पहुंची। जो अब उसका नही था। वो बहुत देर तक दूर खड़ी अपने उस घर को निहारती रही। कितनी मेहनत से उसने वो घर बनाया था। बिना मां-बाप के कैसे ज़िन्दगी के इस मकाम पर पहुंची थी, ये बात सिर्फ वो ही जानती थी। लेकिन ये घर आज उसका नही रहा.... ये घर अब जिया का हो चुका था। ज़ोया का उसपर अब कोई अधिकार नही रह गया था।
वो वापस जाने के लिए मुड़ गयी और कुछ कदम ही चली होगी कि पीछे से किसी ने आवाज़ लगाई,"मैडमsss मैडम रुकिए।"

ज़ोया ने पलटकर देखा। "नरिंदर अंकल आप।"

"हाँ मैडम जी मैं। कहाँ जा रही हैं आप? कहाँ जाएंगी इस समय??" नरिन्दर ज़ोया के हाल से वाकिफ था। आखिर वो ज़ोया का सबसे पुराना ड्राइवर था और ज़ोया उसकी बेटी की उम्र की थी। उसने ज़ोया को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हर प्रकार के संघर्ष से जूझते देखा था।

ज़ोया हंसी अपने हाल पर और दोनो बाहें खोलकर बोली,"कहां जा सकती हूँ ऐसी हालत में?? भटकूँगी रातभर सड़को पर।"

नरिंदर को तरस आ गया उसकी हालत पर। वे उसके सिर पर हाथ रखकर बोले,"वाहेगुरु सब ठीक करेंगे। मेहर करेगा वो ऊपरवाला। तुस्सी चिंता ना करी बिल्कुल भी। आपका ये अंकल अभी ज़िंदा है। और मेरे होते हुए मेरे बेटाजी को रातभर सड़क पर भटकने की नौबत नही आएगी। चल घर चल। वहां चलकर आराम से सोचना क्या करना है? जब तक कोई राह नही मिल जाती तब तक वहीं रहना। आपकी आंटी भी खुश हो जाएंगी। कब से आपसे मिलना चाहती है वो भी।"

ज़ोया ने पहले तो मना किया। लेकिन नरिंदर की ज़िद के आगे उसे झुकना ही पड़ा। और वो दोनो उसके घर पहुंच गए। ज़ोया आज ऊपरवाले का धन्यवाद अदा कर रही थी.... उसने किसी का भला किया था तो आज उसका पुण्य उसके सामने आकर उसकी मदद कर रहा है।
घर पहुंचकर नरिंदर ने अपनी वाइफ पम्मी को सब हाल कह सुनाया। पम्मी को सहानुभूति हुई ज़ोया से। उसने खूब लाड किया उससे। एक अलग कमरे में उसके रहने की व्यवस्था कर दी। आखिर उसके नरिंदर पर कई एहसान थे, जिन्हें चुकाने का अब मौका मिला था उन्हें।
ज़ोया कमरे में आकर लेट तो गयी, मगर नींद नही थी उसकी आँखों मे। वो बस कैसे-क्या हुआ?क्यों हुआ?कौन इसका जिम्मेदार है? इसी का विश्लेषण कर रही थी।
वो लेटे-लेटे सोचने लगी.... आखिर कमी कहाँ रह गयी थी उससे?? सब कुछ तो इतना अच्छा चल रहा था। फिर अचानक से ये भूचाल कैसे आ गया उसके जीवन मे??
वो सारे घटनाक्रमों को सोचने लगी।

फ्लैशबैक
चार साल पहले:-










क्रमशः
आपकी नादान सी लेखिका
सर्वाधिकार सुरक्षित


रेट व् टिपण्णी करें

Mural Paint

Mural Paint 3 सप्ताह पहले

बहुत हि खूब लिखी

Indu Talati

Indu Talati 2 महीना पहले

Indu Beniwal

Indu Beniwal 2 महीना पहले

Nimika

Nimika 2 महीना पहले

Sayma

Sayma 3 महीना पहले