मूल बांग्ला से हिन्दी में अनूदित एकांकी नाटक “अनात्मज” लेखक - निरुप मित्र हिन्दी अनुवाद - मल्लिका मुखर्जी भाग 1 पात्र : सचिन, बिपाशा, अनिरुद्ध, सुहास समय प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक का कोई भी समय (जैसे ही पर्दा उठता है, स्टेज पर अगल-बगल दो कमरे दिखाई देते हैं, जिनके बीच में एक दीवार है। दीवार प्रतीकात्मक भी हो सकती है। उस दीवार के बीच में एक दरवाज़ा है जो बंद है। बाईं तरफ का कमरा एक लिविंग रूम है जिसमें ज़्यादा फर्नीचर नहीं है। एक तरफ बैठने के लिए सोफ़ा है। पास ही एक शीशे वाला ड्रेसिंग टेबल और उसके सामने बैठने के लिए एक स्टूल है। दाहिने कमरे में एक पलंग है। पलंग के गद्दे पर चादर नहीं बिछी है। तकियों के कवर भी नहीं लगे हैं। वहाँ एक छोटी अलमारी या शेल्फ वाला एक रैक है। उसकी एक दीवार में लगी कील पर एक बेल्ट लटका हुआ है, एक कोने में एक टेबल है, उस पर एक छोटा पानी का जग रखा है, उसके ऊपर एक गिलास रखा है।
अनात्मज - बांग्ला एकांकी नाटक - भाग 1
मूल बांग्ला से हिन्दी में अनूदित एकांकी नाटक “अनात्मज” लेखक - निरुप मित्र हिन्दी अनुवाद - मल्लिका मुखर्जी 1 पात्र : सचिन, बिपाशा, अनिरुद्ध, सुहास समय प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक का कोई भी समय (जैसे ही पर्दा उठता है, स्टेज पर अगल-बगल दो कमरे दिखाई देते हैं, जिनके बीच में एक दीवार है। दीवार प्रतीकात्मक भी हो सकती है। उस दीवार के बीच में एक दरवाज़ा है जो बंद है। बाईं तरफ का कमरा एक लिविंग रूम है जिसमें ज़्यादा फर्नीचर नहीं है। एक तरफ बैठने के लिए सोफ़ा है। पास ही एक शीशे ...और पढ़े
अनात्मज - बांग्ला एकांकी नाटक - भाग 2
मूल बांग्ला से हिन्दी में अनूदित एकांकी नाटक “अनात्मज” भाग 2 पात्र : सचिन, बिपाशा, अनिरुद्ध, सुहास (सुहास जल्दी चला जाता है। बिपाशा आह भरती है और सारे पुरस्कार और घड़ी लेकर अंदर चली जाती है। कुछ क्षणों के लिए मंच खाली रहता है। सुहास दाहिनी ओर के कमरे में प्रवेश करता है जो सचिन का कमरा है। लाइट जलाता है। अपने पिता के कपड़े व्यवस्थित करता है, हेंगर में जामा टांगता है। धुली हुई चादर बिस्तर पर बिछाता है। तकिए में कवर लगाता है। बिपाशा दाहिनी ओर के कमरे में प्रवेश करती है।) सुहास: देखो मम्मा, मैंने सब ...और पढ़े
अनात्मज - बांग्ला एकांकी नाटक - भाग 3 (अंतिम भाग)
मूल बांग्ला से हिन्दी में अनूदित एकांकी नाटक “अनात्मज” भाग 3 (अंतिम) पात्र : सचिन, बिपाशा, अनिरुद्ध, सुहास नहीं...नहीं, ये गलत है। ये सरासर गलत है। इससे बड़ा झूठ और कोई नहीं हो सकता। मैं तुम्हारा पिता नहीं हूँ। तुम मेरे बेटे नहीं हो। (बिपाशा हाथ जोड़कर मना करने की गुहार लगाती है।) सुहास: क्या मैं आपका बेटा नहीं हूँ? सचिन: नहीं, नहीं, तुम मेरे बेटे नहीं हो, सुहास। देखना चाहते हो? (वह सुहास का हाथ पकड़कर उसे खींचता है और अगले कमरे में ड्रेसिंग टेबल पर ले जाता है।) सचिन: लो, ठीक से देखो। इस दर्पण के ...और पढ़े