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एक आम सी प्रेम कहानी भाग- १लेखिका "अनामिका"लेखिका की ओर सेअक्सर ऐसा होता हे की ह...
आख़िरी कॉलरात के ठीक 12 बजे थे। नेहा अपने कमरे में अकेली बैठी थी। तभी उसका मोबाइ...
फ्लैशबैक...लगभग छह से सात महीने पहले...पुलिस स्टेशन..."यस सर, आपने मुझे बुलाया।...
“अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम।दास मलूका कहि गए, सब के दाता राम॥” — संत मलूक...
“आपने जवाब नहीं दिया सर।”राजवीर की आवाज़ सुनते ही मैं एक ही झटके से फ़्लैशबैक से...
वर्षा का गीत लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसरआसमान पर काले बादलों ने धीरे-धी...
क्या सच में हमारी परछाई हमें सुन सकती है? अगर ऐसा होता, तो क्या दुनिया के सारे ल...
एपिसोड 40: समाधि का द्वार और अंधेरे का विस्तार---शहर की बेचैनीसमाधि के द्वार से...
वो लड़की जो कभी नहीं हारीलेखिका: कांता जयपालभूमिकाकुछ कहानियाँ पढ़ने के लिए नहीं...
इस महा- श्रृंखला के रचनाकार लोकप्रिय लेखक एवं पूर्व पत्रकार, इकबाल राज हैं. यह क...
हर गांव की अपनी एक पहचान होती है…कोई अपनी सादगी के लिए जाना जाता है, तो कोई अपनी परंपराओं के लिए।लेकिन यह कहानी जिस गांव की है…वह अपनी शान, अपनी रॉयल ठाठ और एक नाम के लिए जाना जाता...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
Part 1: श्रापित गांव ~ साल था 1826। जगह थी - *राजस्थान का गांव "धू-धू"*। पिछले 100 साल से यहां बारिश नहीं हुई। कुएं सूखे। खेत बंजर। लोग भूखे। बूढ़े कहते थे: "य...
“मैडम, क्या आप किसी का इंतज़ार कर रही हैं?” सफेद ड्रेस पहने और हाथ में टैब लिए वेटर ने काम्या से विनम्रता से पूछा। “हाँ… अपने बॉयफ्रेंड का इंतजार कर रही हूं.. वो बस आता ही होगा,...
झूठ बोल कर निकली, ये कहानी शुरू होती है एक झूठ से, प्रतिज्ञा ने अपने घर पर सबको बोला था, कि वो कॉलेज ट्रिप पर जा रही है, लेकिन सच ये था कि, ये कोई आम कॉलेज ट्रिप नहीं थी, ये एक कपल...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...
दुनिया सीधे लोगों की नहीं हैं.... चलाक बनो.. जानकारी उतनी ही इकठी करो जिसको तुम रख सकते हो.. जयादा जानकारी बहुत सेहत के लिए हानिकारक होती हैं.. हाँ मेरी बात अक्सर त्रिपाठी से होती...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
देवक़ेड़ा का रहस्य छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहाँ बसा...
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