पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार

(22)
  • 12
  • 0
  • 9.5k

एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल। इसी शहर में आती है एक छोटे से गाँव की लड़की — आरवी। आरवी सुंदर थी, पर उससे भी अधिक सुंदर था उसका मन। गाँव की सादगी उसमें बसती थी लेकिन सपने ऊँचे थे। उसे लिखने का शौक था। इसीलिए उसने इस पहाड़ी शहर में एक दफ्तर में लेखन का काम पकड़ लिया। धीरे-धीरे उसके शब्द लोगों के दिलों को छूने लगे। उसकी कहानियाँ पढ़कर लोग भावुक हो

Full Novel

1

पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार - 1

शीर्षक: पतझड़ के बादएक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल। इसी शहर में आती है एक छोटे से गाँव की लड़की — आरवी।आरवी सुंदर थी, पर उससे भी अधिक सुंदर था उसका मन। गाँव की सादगी उसमें बसती थी लेकिन सपने ऊँचे थे। उसे लिखने का शौक था। इसीलिए उसने इस पहाड़ी शहर में एक दफ्तर में लेखन का काम पकड़ लिया। धीरे-धीरे उसके शब्द लोगों के दिलों को छूने ...और पढ़े

2

पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार - 2

रित्विक के जाने के बाद कमरे में जैसे सब कुछ ठहर गया था। आरवी उस दरवाजे को देर तक रही जहां से रित्विक निकला था - बिना जबाव दिए, बिना कोई वादा किए। वो पल, जो एक सपने जैसा लग रहा था, अब एक अधूरी कहानी बन चुकी थी। वो नही जानती थी कि रित्विक लौटेगा भी या नहीं, पर दिल ने ठान लिया था... कि इंतजार तो करना ही होगा। समय बीत रहा था, लेकिन की लम्हें आज भी वहीं रुके थे। आरवी अब पहले जैसी नही थी। वो अब एक मां थी, एक लेखिका थी, और अब... ...और पढ़े

3

पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार - 3

ज़िंदगी भी कभी कभी क्या अजीब खेल खेलती है। जब हम सब कुछ भूलकर, सब कुछ फिर से शुरू को तैयार, होते हैं - बिना किसी उम्मीद के, तब वही ज़िंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जिसकी हमने कभी कल्पना तक नही की होती।आरवी भी तो बस एक समारोह में हिस्सा लेने आई थी, उस नए अंजान शहर में जहां वो किसी को नहीं जानती थी। लेकिन वहां उसे वो दिखा, जिसकी उम्मीद उसने कब की छोड़ दी थी।उस चेहरे को देख कर आरवी की सांसे थम गई। वो समझ नहीं पा रही थी - क्या ये ...और पढ़े

4

पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार - 4

कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हम बोल भी नहीं सकते और सुन भी नहीं। और अगर वो बातें हमारे सामने आ जाएं, जिनकी कभी हमने कल्पना तक नहीं की थी, तो क्या हो? कुछ ऐसा ही था रित्विक का सच - जिसे जानकर आरवी को लगा जैसे ज़मीन खिसक गई हो। जिस इंसान को उसने सबसे ज्यादा चाहा, उसी ने कुछ छिपाया, कुछ झूठ बोला। उस पल आरवी को महसूस हुआ मानो सबकुछ खत्म हो गया हो। आसमान में बिजली कड़की - जैसे कोई तूफान आने वाला हो और अंदर-बाहर सब कुछ तोड़ देने को तैयार हो। थोड़ी ...और पढ़े

5

पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार - 5

अगर ज़िंदगी में सब कुछ आसानी से मिलने लगे, तो हम कभी किसी चीज़ की असली कीमत नहीं समझ - न ही खुशी की, और न ही दुःख की। प्रकृति हमें हमेशा सिखाती है कि किसी के जाने से कुछ नहीं रुकता, और किसी के लौट आने से पहले जैसा कुछ भी वापस नहीं आता। जब रित्विक ने आरवी को अपना सच बताया, तो चाय के कप ठंडे हो चुके थे और बारिश भी थम चुकी थी। सुबह होने को थी रात के सन्नाटे में पक्षियों की चहचहाट थी अब बचा था तो सिर्फ एक सवाल- क्या आरवी उसे ...और पढ़े

अन्य रसप्रद विकल्प