कराके की ठंड थी, और आसमान पूरी तरह काले बादलों से ढका हुआ था। हवाएँ ज़मीन पर बर्फीली सिहरन छोड़ रही थीं, और जंगल की गहराई में खड़ी एक उजाड़ हवेली अंधेरे में डूबी हुई थी। केवल एक धुंधली पीली रोशनी हवेली के खंडहर में टिमटिमा रही थी, मानो किसी अनजान शक्ति की मौजूदगी को दर्शा रही हो।उस अंधेरी रात में, घने कोहरे के बीच, हवेली के सामने एक रहस्यमयी शख्स खड़ा था। उसका काला हुड चेहरे को आधा ढँके हुए था, लेकिन उसकी सिल्वर रंग की आँखें धीरे-धीरे गहरी लाल होने लगीं। उन चमकती आँखों में इतनी गहराई और भय था कि अंधेरा भी उनसे कांप उठा।उसकी लंबी कद-काठी को हाई-कॉलर क्लोक और भी प्रभावशाली बना रहा था। ठंडी हवाओं में उसका काला लिबास हवा में लहरा रहा था, मानो अंधकार उसके कदमों को छूकर गुजर रहा हो। उसकी उपस्थिति इतनी भारी थी कि आसपास की काली शक्तियां भी उसकी ऊर्जा को महसूस कर रही थीं।

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Eclipsed Love - 1

कराके की ठंड थी, और आसमान पूरी तरह काले बादलों से ढका हुआ था। हवाएँ ज़मीन पर बर्फीली सिहरन रही थीं, और जंगल की गहराई में खड़ी एक उजाड़ हवेली अंधेरे में डूबी हुई थी। केवल एक धुंधली पीली रोशनी हवेली के खंडहर में टिमटिमा रही थी, मानो किसी अनजान शक्ति की मौजूदगी को दर्शा रही हो।उस अंधेरी रात में, घने कोहरे के बीच, हवेली के सामने एक रहस्यमयी शख्स खड़ा था। उसका काला हुड चेहरे को आधा ढँके हुए था, लेकिन उसकी सिल्वर रंग की आँखें धीरे-धीरे गहरी लाल होने लगीं। उन चमकती आँखों में इतनी गहराई और ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 2

रक्ताचार्य ने जैसे ही कुछ मंत्र उच्चारण करते हुए हल्के से एक धारदार तलवार उस युवती के एक हाथ ले जाकर अचानक उसके हाथ को तलवार के सहारे आगे की तरफ करते हुए उसकी कलाई पर तेजी से प्रहार किया । जिससे उस युवती के एक तेज चीख के साथ रक्त की पहली बूँद उस यज्ञ कुंड में जा गिरी और इतने में उस पूरे तहखाने में जैसे हलचल मच गई थी। हवा अचानक ठंडी और भारी हो गई थी।रक्ताचार्य गहरी आवाज में मंत्र पढ़ते हुए बोला- "देवी चंडिका, इस पवित्र रक्त को स्वीकार करो। इस रक्त के माध्यम ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 3

सांझ ढल रही थी, और सूरज की आखिरी किरणें खेतों में बिखर रही थीं। एक काली, विशाल भैंस खेतों बीच बेकाबू दौड़ रही थी, उसकी भारी टापों की गूंज दूर तक सुनाई दे रही थी। उसकी पीठ पर एक नन्ही बच्ची सवार थी, मुश्किल से खुद को संभाले हुए।उसकी छोटी उंगलियाँ बफ़ेलो के खुरदुरे शरीर को कसकर थामने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन जानवर की तेज गति ने उसे डगमगा दिया। उसकी आँखों में डर था, और होठों से हल्की चीख निकल पड़ी—"आह ,बचाओ! प्यारी चुलबुल प्लीज रुक जाओ पानु को डर लग रहा है। "वो लड़की अपनी ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 4

उस छोटी बच्ची के मुंह से इतनी बड़ी बड़ी बातें सुनकर पावनी की आंखे हैरानी से फैल गई और तुंरन्त उसे अपने गोद में उठाकर के बोली-” aww थोड़ा मुझे भी तो बताओ हमारी रिहा ने पानु दीदी की कौन सी टॉप सीक्रेट अपने इस बेबी हार्ट में छुपाकर रखा हुआ है।” कहते हुए वो उसके स्टमक में हल्के से टेकलिंग करते हुए उसे देख रही थी।रिहा उसके बाहों में क्यूट सी जैली फिश की तरह मचलते हुए बोली-" अरे पहले रिहा को टेकलिंग करना तो बन्द करो वरना वो बोलेगी किस तरह से?"पावनी उसे चुपचाप देख रही थी। ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 5

आशीर्वाद अनाथालय, देहरादून।लोग सही कहते हैं, अक्सर ज्यादा खुशियों को कभी-कभी अपनी ही नजर लग जाती है। सुबह सुबह उत्साह और प्यार से सब लोग इक्कठा होकर पावनी का 17वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे थे । कितने खुश थे सब लेकिन किसे पता था ये खुशियां बस चंद लम्हों की मोहताज थी।अचानक जब शांति जी बेहोश होकर गिर गई तो रमा जी -” शांति जी।” कहकर चिल्लाते हुए उन्हें संभालने के लिए आगे आ गई थी।इसवक्त अचानक से रमा जी की चीख सुनकर वहांपर मौजूद सभी घबरा गए थे, और पावनी ने हड़बड़ाते हुए कहा-” माँ ।” और तेजी ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 6

इसवक्त अस्पताल का ये रूम नम्बर 55 गहरे सन्नाटे में डूबा हुआ था। सिर्फ मशीनों की बीप और शांति की धीमी सांसों की आवाज ही इस खामोशी को तोड़ रही थी।कमरे की ठंडक में भी, पावनी का चेहरा पसीने से भीगा हुआ था। वह शांति जी के पास बैठी, उनका हाथ थामे हुए थी। उसके चेहरे पर डर, बेचैनी, और भावनाओं का सैलाब उमड़ रहा था।शांति जी की हालत देखकर पावनी की आंखों से आंसू बह रहे थे। वह कभी उनके चेहरे को निहारती, तो कभी उन मशीनों की तरफ देखती, जो उनकी जिंदगी की डोर को पकड़े हुए ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 7

निशान ने पावनी की बात सुनकर उसे देखते हुए कहा-” लेकिन पानु तुम नर्क में नहीं जा सकती।”पावनी दोनों को आपस में तेज तेज रगड़ते हुए बोली- “और क्यों नहीं जा सकती मैं जरूर जाऊंगी देखना तुम।” ये कहते हुए वो उसे देख रही थी।निशान उसे समझाते हुए बोला-”ओफ्फो पानु जहां तक मुझे याद है ना वहां सिर्फ बुरे लोग ही जा सकते हैं और तुमने तो आजतक एक चींटी को भी नुकसान नहीं पहुचाया फिर कैसे जाओगी तुम नर्क में बताओ मुझे?”जिसपर पावनी सीरियस चेहरा बनाकर बोली-” तो पहले मैं एक पिचासनी बनकर तुम्हारा खून पी जाऊंगी फिर ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 8

हॉस्पिटल।पावनी ने उस रूम नम्बर 55 के गेट को ओपन करने से पहले एक गहरी सांस ली फिर वो भावनाओं को समेटकर हल्के से गेट खोलते हुए अपनी गोल मटोल आंखों से अंदर झांकने लगी। वो बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से शांति जी की नींद ज़रा भी डिस्टर्ब हो।अंदर एक नर्स इसवक्त शांति जी को जो ड्रिप लगी हुई थी। उसे चेक कर रही थी और शांति जी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। उनकी आँखों में थकान थी, लेकिन जैसे ही उन्होंने पावनी को अंदर आते देखा, उनके चेहरे पर राहत की हल्की झलक आई।"पानू ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 9

वो स्पोर्ट्स कार इतनी तेज़ी से उछलकर सड़क पर आकर रुकी थी कि उसके टकराने से सड़क पर हल्की चिंगारियाँ उठ गईं। टायरों की जलने की महक हवा में फैल गई। ऐसा लगा मानो ज़मीन काँप उठी हो।लेकिन गाड़ी को रोककर खड़ा वो शख्स ज़रा भी विचलित नहीं हुआ था। उसकी सिल्वर आँखें अब भी वैसी ही चमक रही थीं, जैसे उसकी गहराई में कोई खौफनाक तूफान दबा हुआ हो।वो किसी और को नहीं देख रहा था—बस ड्राइविंग सीट पर बैठे उस व्यक्ति को घूर रहा था, जिसने पावनी को अनजाने में ही सही लेकिन नुकसान पहुचाने की गुस्ताखी ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 10

आशीर्वाद अनाथालय।पूरा आशीर्वाद अनाथालय अचानक जैसे शोक में डूब सा गया था। अब न यहां से कोई हंसी की गूँजती थी न किसी बच्चे के चहकने की। सबकुछ जैसे शांति जी अपने साथ ही लेकर चली गई थी।।उनको गुजरे हुए अभी दो दिन पूरे हो चुके थे। अनाथालय में उनके आत्मा-शांति के लिए लोग आते-जाते रहते थे और असेम्बली हॉल में उनकी प्रतिमा के सामने धूप बत्ती जलाकर लोग रमा जी को सांत्वना देते और चले जाते थे।लेकिन पावनी ने तब से अपना दरवाजा नहीं खोला था। वह शांति जी के कमरे में खुद को बंद करके उनकी यादों ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 11

आशीर्वाद अनाथालयरमा जी ने उस कमरे के अंदर आकर लाइट ऑन करके पावनी को देखा।पावनी शांति जी के बेड एकदम कोने से लगकर सिर झुकाए बैठी थी। उसकी आँखों में गहरी उदासी थी, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी आंसू नहीं थे।रमा जी आगे जाकर ड्रॉर से कुछ लेकर आई फिर उसके पास बैठ गईं और उसकी ओर प्यार से देखा।"पानू, क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहती हो?" रमा जी ने धीरे से कहा।पावनी ने सिर उठाया, उसकी आँखें शांति जी के बिना खोई हुई सी लग रही थीं। वो धीरे से बोली- "काकी, मुझे कुछ समझ में नहीं ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 12

आशीर्वाद अनाथालयधुंधली शाम का वक्त था। आसमान में सूरज अपने आखिरी किरणों को बिखेर रहा था। अनाथालय के आंगन हल्की-हल्की ठंडक महसूस हो रही थी। आज शांति जी की तेरहवीं थी। अनाथालय के बच्चों और वहां के लोगों के दिलों में भारी उदासी थी। शांति जी सबके लिए माँ समान थीं। ऐसा लग रहा था जैसे उनके बिना, अनाथालय अपना आधार खो चुका था।तेरहवीं की विधि पूरी हो चुकी थी। मेहमान एक-एक कर अपने घरों को लौट रहे थे। चारों ओर एक गहरी खामोशी पसरी हुई थी। इस खामोशी के बीच, पावनी अपने कमरे में अकेली बैठी थी। उसके ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 13

मुंबई शहरमुंबई की पहली रात शाम का धुंधलापन मुंबई के आसमान पर छा चुका था। ट्रेन की खिड़की से झाँकते हुए पावनी ने देखा कि शहर की रोशनी धीरे-धीरे जगमगाने लगी थी। ट्रेन देर हो गई थी—रास्ते में कहीं रुकावट की वजह से।उसकी घड़ी में शाम के 6 बज चुके थे। अनाथालय की शांत शामों के बाद ये हलचल भरी दुनिया उसे किसी सपने जैसी लग रही थी, लेकिन इस सपने में डर का एक हल्का-सा रंग भी घुला हुआ था।बेशक वो अपने फ्यूचर को लेकर एक्सआइटेड थी लेकिन फिर भी काफी कुछ चीजें वो लाइफ में पहली बार ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 14

मुंबई शहर।रात के यहीं कोई बारह बज रहे थे। लेकिन मुंबई शहर में इस वक्त भी चहल-पहल कुछ कम थी। गगनचुंबी इमारतों की रोशनी आसमान को चीरती हुई ऐसे चमक रही थी, जैसे तारे जमीन पर उतर आए हों। चौबीसों घंटे जागते इस शहर में रात और दिन का कोई फर्क महसूस ही नहीं होता था।सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों की हेडलाइट्स मानो रास्तों पर सुनहरी धारियां खींच रही थीं। दूर कहीं किसी होटल से धीमी-धीमी म्यूजिक की आवाज आ रही थी, जबकि फुटपाथ के किसी कोने में बेजान पड़ी जिंदगी से किसी को कोई खास मतलब नहीं था।लेकिन इन ...और पढ़े

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Eclipsed Love - 15

मुंबई शहर।रात के यहीं कोई बारह बज रहे थे। लेकिन मुंबई शहर में इस वक्त भी चहल-पहल कुछ कम थी। गगनचुंबी इमारतों की रोशनी आसमान को चीरती हुई ऐसे चमक रही थी, जैसे तारे जमीन पर उतर आए हों। चौबीसों घंटे जागते इस शहर में रात और दिन का कोई फर्क महसूस ही नहीं होता था।सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों की हेडलाइट्स मानो रास्तों पर सुनहरी धारियां खींच रही थीं। दूर कहीं किसी होटल से धीमी-धीमी म्यूजिक की आवाज आ रही थी, जबकि फुटपाथ के किसी कोने में बेजान पड़ी जिंदगी से किसी को कोई खास मतलब नहीं था।लेकिन इन ...और पढ़े

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