जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए

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जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए... गोपाल दास नीरज की ये पंक्तियाँ केवल कविता की सुंदर अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि हमारे जीवन और समाज के लिए एक गहरा संदेश हैं। दीपावली आती है तो पूरा देश रोशनी से नहा उठता है। घर-आँगन सजते हैं, बाजार जगमगाते हैं, पटाखों और फुलझड़ियों की आवाज आसमान तक गूँजती है। नए कपड़े, मिठाइयाँ, उपहार और करोड़ों-अरबों का कारोबार त्योहार की रौनक बढ़ाते हैं। हर ओर उल्लास है, उत्सव है, चमक है। लेकिन इस चमक-दमक के बीच एक सवाल मन को बेचैन करता है—क्या सचमुच अँधेरा मिट रहा