आरुणि की गुरुभक्ति

  • 492
  • 147

आरुणि की गुरुभक्तिअपने गुरु महर्षि धौम्य की आज्ञा पाकर शाम को छतरी और टॉर्च लेकर आरुणि अपने सर्वसुविधायुक्त गुरुकुल आश्रम के ठीक पीछे स्थित खेतों की ओर निकल गया। वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि खेत की मेड़ जगह-जगह से कटी हुई हैं। पानी द्रुत गति से खेतों से निकल कर आगे बहता जा रहा है। पानी के साथ हाल ही में रोपे गए पौधे भी बह रहे हैं। तेज गति से बारिश भी हो रही है और थमने के कोई आसार भी नहीं लग रहे। रात गहरी होती जा रही है। आरुणि धर्मसंकट में पड़ गया। वह पिछली बार की