सपने

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सपने लेखक: विजय शर्मा एरीगाँव की धूल भरी गलियों में जब सूरज डूबता था, तो राधे श्याम की आँखों में एक अजीब-सी चमक आ जाती थी। चौदह साल का वह लड़का खेतों से लौटते हुए अक्सर आसमान की ओर देखता और सोचता—“क्या सपने सच होते हैं, या सिर्फ फ़साने होते हैं जो हमें धोखा देते हैं?”उसका घर गाँव के आखिरी छोर पर था—लाल मिट्टी की दीवारें, खपरैल की छत, और एक पुराना ताला जो सालों से जंग खा रहा था। पिता मजदूर थे, माँ सिलाई करती थीं। राधे श्याम सुबह से शाम तक पिता के साथ खेत में काम करता। हल