यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

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                          : प्रकरण - 26 : बिभूति ने भी मेरी कहानी पढ़ी थी, जिस में उसे खुद का प्रतिबिम्ब नजर आया था.उसे पढ़कर वह काफ़ी प्रभावित हुई थी." उस की एक एक बात को मैंने बारीकी से कहानी में प्रस्तुत की थी उस की वॉट्स अप पर सुदेश से बात होती थी. उस ने मेरे बारे में उस को सब कुछ बताया था. जानकर उस ने भी ख़ुशी व्यक्त की थी.आज के दौर में बिना मिले ऐसा प्यार पनप सकता हैं! यह मानने वाली बात नहीं थी. लेकिन