: प्रकरण - 24 :बिभूति को मिलने की ख्वाहिश मेरे दिल में एक दिये की तरह जलती रही थी.. ना तो वह कभी बुझी थी ना तो उस की रौशनी मंद हुई थी. उम्मीद की किरणों के उजाले में वह सदैव जीवंत रही थी. एक बार मेरी तबियत ख़राब थी. उस वक़्त मैंने कृष्णा को गुजारिश की थी." मुझे बिभूति से बात करनी हैं."उस दिन इतवार था. सुबह के दस बज गये थे. फिर भी मैं बिस्तर में लेटा था. कृष्णा ने मेरे कहने पर बिभूति को वीडियो