: प्रकरण - 17 : शेठ ब्रदर्स में पगार का धोरण काफ़ी निम्न कक्षा का था. कोई भी सदस्य अपनी तनख्वाह से संतुष्ट नहीं था. बढ़ती हुई महेंगाई में गुजरान करना काफ़ी मुश्किल प्रतीत हो रहा था.ऊस स्थिति में सब मिलकर मैनेजमेंट से बात करने को तैयार हो गये थे, जिस का नेतृत्व मैंने औऱ एक ब्राह्मण ने संभाला था.वह मैनेजमेंट की बिरादरी का था. ना जाने उस को कया पट्टी पढ़ा दी थी. वह उन की गोद में बैठ गया था औऱ हमारी हार का निमित्त