यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

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                          : प्रकरण -12 :राम कुमार चाहते हुए भी मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सके थे.मुझे अपने एक रिश्तेदार की मदद से ' शेठ ब्रदर्स ' में जोब मिला था.कुछ दिनों के बाद स्टेनो टाइपिस्ट के जोब के लिये फ्लोरा को नियुक्त किया गया था.उस के जोब के पहले देने वह मुझे ओफिस के विजिटर्स कक्ष में मिल गई थी. उस ने मुझे गुड मोर्निंग विश किया था. मैंने भी उसे विश किया था. ओफिस में ओपरेटर क़ो छोड़कर सब से पहले मेरा उस से परिचय हुआ था. पांच