यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

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                       :  प्रकरण - 7::उस वक़्त गरिमा कुछ काम से बाहर आई थी. वह अनुराग को पहचानती थी. उस के पूछने पर अनुराग के दोस्त ने सारी परिस्थिति समझाई थी.और उस ने फोन पर मुझ से बात की थी.जिस से मैं अपना आपा खो बैठा था. मैंने कुछ अनाप शनाप बातें की थी सुनकर वह मुझ पर वह भड़क गई थी. उस ने मुझे रोकते हुए साफ चेतावनी दी थी." ऐसी बातें करोंगे तो मैं नहीं आउंगी.. "मैंने उस की माफ़ी मांगी थी. और दूसरे दिन दो बजे मुझे मिलने