एपीसोड 4 नासमझी

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मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष का रिज़ल्ट आया तो मेरी खुशी केवल मेरी नहीं रही।माँ-पापा खुश थे। मेरी बहनें खुश थीं। प्रीति के परिवार ने मुझे बधाई दी। गाँव में जिन्हें मेरे अंक पता चले, वे पापा से कहते, “मधुकर, तुम्हारी बेटी अच्छा कर रही है।”पापा हर बार ऐसे मुस्कुराते जैसे मैंने उन्हें फिर से दसवीं का रिज़ल्ट दिखाया हो।मैंने खेतों में मजदूरी की थी। अब मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही थी। मेरे लिए यह रिज़ल्ट पापा की मेहनत और माँ के संघर्ष की जीत था। उन लोगों को जवाब भी था जिन्होंने कभी पूछा था कि गाँव की लड़की