बांसुरी की धुन भाग :-१७

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Writingबाँसुरी की धुनभाग १७ — रिश्तों की वापसीपीपल के पेड़ के नीचे सभा अब भी जारी थी। माही के सवालों ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया था। कोई परंपरा के पक्ष में था, तो कोई न्याय की बात कर रहा था।माही अपनी माँ और चाची के पास खड़ी थी। रामलाल कुछ दूरी पर सिर झुकाए बैठा था। उसके चेहरे पर अपमान, थकान और वर्षों की पीड़ा साफ दिखाई दे रही थी।मांझी हाड़ाम ने सभा की ओर देखा।“अब रामलाल भी कुछ कहना चाहता है। उसे अपनी बात रखने दो।”रामलाल धीरे-धीरे उठा। उसने सामने बैठे लोगों को देखा। उसकी आँखें भर