अध्याय 1: खुद को जानो गहराई से

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सागर, माया और नियतिमेरे मुख से निकले वचन“सागर मेरी माया, मुकद्दर मेरा, इस समस्त ब्रह्मांड को बनाया मेरे छंद। आज नहीं तो कल ही सही, ये हम कलयुग को बदल लेंगे। मृत्यु मछी की धरती पर पाताल बिसुख को देख लेंगे। आने वाले को हम बदलते देंगे, नियति के तारों में हम यूँ खटक लेंगे। सूरज चाँद बसाओगे आसमान में, तारों में ब्रह्म का बाँह बताओगे। गाया तेरी इच्छा और जो है मेरी स्वेच्छा, सागर तेरी यह राह है बात...”प्रस्तावना: अपने भीतर उतरने की शुरुआतमनुष्य का जीवन केवल वह नहीं है, जो उसकी आँखें देखती हैं। उसके भीतर भी एक