मैं जहाँ से आती हूँ, वह एक बहुत छोटा-सा गाँव था।इतना छोटा कि खेती के अलावा गुज़ारा करने के ज़्यादा रास्ते दिखाई नहीं देते थे। ज़्यादातर परिवार अपनी खेती करते थे या दूसरों के खेतों में मजदूरी करके घर चलाते थे। हमारा परिवार भी उन्हीं में से एक था।लेकिन मेरे माँ-पापा की सोच हमारे हालात से कहीं बड़ी थी।माँ अक्सर हम बहनों से कहती थीं, “हमने ज़िंदगी में जितना संघर्ष किया है, तुम लोगों को उतना नहीं करना पड़े। बस पढ़ाई करना।”पापा भी यही चाहते थे। दूसरे एपिसोड में मैंने आपको बताया था कि मैं छोटी उम्र से माँ के