पहचान मजीठा का नौजवान - अध्याय 6

अध्याय 6 — जसबीर कौरहवलदार जोगिंदर सिंह के जीवन में अब धीरे-धीरे स्थिरता आने लगी थी। जिस युवक ने कभी शरणार्थी शिविर में बैठकर अपने परिवार के भविष्य की चिंता की थी, वह अब भारतीय सेना में सम्मानजनक पद पर था। नियमित वेतन मिलने लगा था और परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले से बेहतर हो गई थी।लेकिन पिता की नजर में बेटे का जीवन तब तक अधूरा था, जब तक उसका अपना परिवार न बस जाता।एक दिन उन्होंने जोगिंदर से कहा, “बेटा, तूने अपनी जिम्मेदारियाँ अच्छी तरह निभाई हैं। अब समय है कि तू अपने जीवन के बारे में