"अरे भाई सुनो।" सागर भाई ने अपने साथी के साथ घोड़ा पकड़कर चलते हुए रास्ते में एक आदमी को रोका"हा कहिए भाई, कोई मदद चाहिए।" वो उनकी तरफ़ मुड़ गया"मुझे बेलोस हवेली जाना है आप मुझे वहा का रास्ता बता देंगे।""बेलोस हवेली?" वो दोनों को ग़ौर से देखने लगा"हां भाई, हमें तोहफ़ा पहुंचाना है।" "अच्छा।" उसके चेहरे पर से सवालिया निशान मिट गया "आप यहां से सीधे रास्ते चले जाइए आप को मालूम हो जाएगा बे लोस हवेली कहा हैं।" बताकर वो चला गया। उसकी बात पर सागर भाई ने लंबी सांस खींचा "चलो भाई राघव अब इस पहेली को भी बुझते