एक सपना -अपना आसमान, अपना घरपीहू ने अब अपना छोटा सा कोचिंग सेंटर खोल लिया था। एक कमरे में दो टेबल, एक ब्लैकबोर्ड और वही पुरानी फोटोकॉपी मशीन। बेटा आरव भी उसके हर काम में उसकी सहायता करता। आरव अब बारहवीं क्लास में आ चुका था, काफी समझदार हो गया था।पर पीहू के दिमाग में कुछ बड़ा चल रहा था। वह सिर्फ आज के बारे में नहीं सोच रही थी। उसे अपने बेटे के लिए सफर आसान करना था। वह सोच रही थी अपने बेटे के लिए एक बिजनेस का ऐसा मार्ग बना दूँ, जिससे उसके बेटे को कभी नौकरी