सूरज की पहली किरण जब रामपुर गाँव पर पड़ी, तो रोज़मर्रा की शांति एक खौफनाक चीख के साथ टूट गई। सुबह मवेशी चराने निकले कुछ ग्रामीणों की नज़र जब गाँव के बहार स्थित पुराने शिव मंदिर के खंडहर पर पड़ी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अंदर विक्रम की लहूलुहान लाश बेजान पड़ी थी।कुछ ही पलों में यह खबर पूरे गाँव में आग की तरह फैल गई। लोग खंडहर के बाहर इकट्ठा होने लगे। हर कोई सहमा हुआ था और आपस में फुसफुसा रहा था— "अरे, ये तो विक्रम है!", "कल रात तक तो यह यहीं था, किसने इतनी