मेरी पहली हवाई यात्रा

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मेरी पहली हवाई यात्रामैंने कभी सोचा भी नहीं था कि आसमान में उड़ने का दिन कभी आएगा। बचपन से ही मैंने हवाई जहाज़ को दूर से देखा था—आकाश में सफ़ेद रेखा छोड़ता हुआ छोटा-सा बिंदु। जब भी कोई जहाज़ गुज़रता, मैं छत पर चढ़कर घंटों देखता रहता। माँ कहा करती थीं, “बेटा, एक दिन तू भी उड़ेगा।” उस समय लगता था कि यह सिर्फ सपना है। लेकिन सपने कभी-कभी सच हो जाते हैं।वह दिन था 15 अक्टूबर। मेरे चाचा अमेरिका से आए थे। वे मुझसे बहुत स्नेह करते थे। उन्होंने कहा, “इस बार तू मेरे साथ दिल्ली से मुंबई जाएगा।