बेटी का पिताएक पिता का प्रेम, बेटी की मजबूरी और पछतावे की भावुक कहानीलेखक: कांतिभाई राठौड़ ‘बदामिया’---समर्पणयह कहानी उन सभी पिताओं को समर्पित है, जिनकी बेटियाँ विवाह के बाद दूसरे घर चली जाती हैं, लेकिन जिनके दिल में बेटी के लिए प्रेम कभी कम नहीं होता।और उन बेटियों के नाम भी, जो दो परिवारों के बीच अपने रिश्तों को बचाने की कोशिश में कभी-कभी अपने ही पिता का दिल दुखा बैठती हैं।भूमिका — बेटी पराई नहीं होतीबेटी जब जन्म लेती है, तो पिता की दुनिया में खुशियों के फूल खिल जाते हैं। वह उसकी उँगली पकड़कर चलना सीखता है,