संन्यासिन मौसी (मां) अम्मा अब बहुत बूढी हो गयी है, उनसे चला फिरा भी नहीं जाता है ,परंतु अम्मा बड़े हंसमुख स्वभाव की महिला रही है, सभी के खानपान का ध्यान रखना अम्मा की विशेषता रही । डॉ राकेश शर्मा अम्मा की सेवा में कोई कोर कसर नहीं रखते थे, उनके खाने का, दवाई का बहुत ध्यान रखते हैं । जब तब वे अम्मा से पूछते -"क्या खाओगी अम्मा —"? कभी अम्मा कहती "पुआ खाना है ।" तो डॉक्टर साहब स्वयं ही आटा में गुड़ या शक्कर डालकर मिलाकर रख देते और गैस पर तेल