दस्तक देती ख़ुशियां जो मीरास महल के दरवाज़े पर तयार खड़ी, फूलों के बीच से अपने स्वागत का इंतज़ार करती सबकी आंखों में बिखर रहीं थीं। उन ख़ुशियों की आमद के लिए सभी नौकर मिलकर पर मीरास महल की शान बढ़ाने के लिए अपने अपने कामों में मसरूफ़ थे, और मीरास महल के दरों दीवारों को खिलखिलाता देखने की उम्मीद में आस लगाए, दूसरी हर बात को नज़रंदाज़ किए हुए थे।चारों तरफ़ सजावट का शोर उठ चुका था। कहीं कोई कह रहा "अरे, वो लाल फूल परदे के पास भी रहेंगे।" कही पीले फूलों की जगह तय की जा रही