"अरे संभलकर, कहीं फूलों के मोह में अपने उनको याद करते हुए गिर मत जाना।"फुलों की टोकरियां ले जाते हुए खदिमाएं रुक्मणि से रास्ते में टकराकर उसे हंसकर चिढ़ाते हुए छेड़ने लगी"वैसे बताइए रुक्मणि दीदी... कहां हैं आपके वो, सुबह से नज़र नही आएं?" दूसरी खादिमा ने भी छेड़ते हुए पूछाहया भी इनके पास खड़ी मंद मुस्कुराने लगी, इसी में से दूसरी ख़ादिमा ने पहली का जवाब दिया"क्या तुम्हें ख़बर नहीं, इनके वो तो गांव के चक्कर लगाने के लिए चले गए हैं।" उसके बाद सब ठिठोलिया लगाने लगीं। इनकी बातों पर रुक्मणि ने शर्माते हुए इन्हें फटकार लगाया"अच्छा बस, चलो