अनकहा सच (भाग -5)

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अनकहा सच___राजू और हितेश घर जाने के लिए निकल पड़े।हितेश आज बेहद खुश था। आखिर वह पहली बार राजू को अपने गाँव ले जा रहा था, उसे अपने घरवालों से जो मिलवाना था। पूरे रास्ते हितेश के चेहरे पर एक अलग ही उत्साह तैर रहा था। वह मन ही मन योजनाएँ बना रहा था कि गाँव जाकर राजू को क्या-क्या दिखाएगा और घर पर कैसे सबका परिचय करवाएगा।लेकिन दूसरी तरफ राजू की हालत बिल्कुल अलग थी। उसके मन में रह-रहकर एक अजीब सी हलचल, एक बेचैनी मचल रही थी।दोनों बस स्टैंड पहुँचे और गाँव जाने वाली बस में बैठ गए।