"मैं अंदर आ जाऊं?" दरवाज़े की तरफ़ से आई हुई आहिस्ता सी मायूस पुकार ने अम्मा साहब का ध्यान अपनी तरफ़ किया"आ जाइए।" अम्मा साहब ने दरवाज़े की तरफ़ नज़र करके कहा। अम्मा साहब के साथ शेख़ बाबा और अम्हेल भी मौजूद थे। उनकी नज़रें भी दरवाज़े की तरफ़ पहुंच गई ज़य्यान ने अपने क़दम अंदर किए, मायूसी उसकी आंखों में बसी हुई थी। अंदर आते सामने अम्हेल को देखकर वो कुछ पल के लिए ठहरा, लेकिन अगले पल ही वो अम्मा साहब की तरफ़ बढ़ गया"आपने याद किया मुझे?" उसने अम्मा साहब के सामने आकर पूछा"कल से आप नाजाने कहां