धुएं की सिंडिकेटबंदरगाह के टर्मिनल्स पर रात का अंधेरा कभी पूरी तरह से गहरा नहीं होता था। विशाल सोडियम लाइटों की पीली रोशनी में कोयले की काली धूल और यूरिया की बारीक परत हवा में तैरती रहती थी। जेटी नंबर चार पर जहाजों से कोयला खाली करने वाली क्रेनें विशाल राक्षसों की तरह झुकी हुई थीं। हवा में लोहे की रगड़, नमकीन समुद्र और यूरिया की हल्की गंध एक अजीब सा मिश्रण बना रही थी।मुस्तफा अली अपनी पुरानी जिप्सी का बोनट टेककर खड़ा था। उसकी उम्र पचास के पार थी, और आंखों के नीचे पड़े गहरे गड्ढे यह बताने के