कहानी - घूँघट के पट खोलविजय नगर का रेलवे स्टेशन। नाम बड़ा था, पर स्टेशन बहुत छोटा। पूरे दिन में दो ही गाड़ियाँ आती थीं। न चाय की दुकान, न स्टॉल। सन्नाटा इतना कि सीटी की आवाज दूर तक सुनाई देती थी।उसी सन्नाटे में एक बेंच पर दो नए शादीशुदा जोड़े बैठे थे। दोनों दुल्हनें नई-नई, सिर से पाँव तक लाल जोड़े में, घूँघट काढ़े। चेहरा किसी ने नहीं देखा था, देख भी कैसे सकते थे, घूँघट तो आँखों तक गिरा था।एक दुल्हन को प्यास लगी। उसने धीरे से अपने पति से कहा, "पानी।"उसका पति बेचारा घबराया। स्टेशन पर पानी