बांसुरी की धुन - भाग 13

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बाँसुरी की धुनभाग 13 — अपनी जड़ों की तलाशस्कूल की छुट्टी हो चुकी थी। अन्य दिनों की तरह रामलाल अपने घर की ओर लौट रहा था। तभी प्रधानाध्यापक सुनील झा ने उसे आवाज देकर रोक लिया।मुस्कराते हुए उन्होंने पूछा—“क्यों रामलाल, आज इतनी जल्दी जा रहे हो? सब ठीक तो है?”फिर उसके चेहरे की ओर देखते हुए हँसकर बोले—“जब से तुमने ठाकुर जी से दीक्षा ली है, तुम्हें देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। पहले शराब पीकर नाले में पड़े रहते थे, लेकिन अब घर-परिवार, पत्नी, समाज और धर्म की बातें करते हो। आदमी जब स्वयं को बदलने का संकल्प ले