अनकहा सच (भाग - 3)

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अनकहा सच___धीरे-धीरे हितेश और राजू की दोस्ती बहुत गहरी होती जा रही थी। दोनों इस अजनबी शहर में अपनी-अपनी ज़िंदगी जी रहे थे, पर हर दिन का उनका एक-दूसरे का साथ उनके सफ़र को आसान बना रहा था।ऐसे ही बातों-बातों में एक दिन हितेश ने राजू से पूछ ही लिया, "अरे यार, तू कभी गाँव नहीं जाता क्या? मतलब... मैंने तुझे हमेशा यही देखा हैं, कभी घर जाते नहीं देखा।"हितेश का यह अचानक पूछा गया सवाल सुनकर राजू थोड़ा घबरा गया।  उसने खुद को संभालते हुए कहा, "जाता तो हूँ... शायद तेरा ध्यान नहीं रहा होगा।"हितेश ने थोड़ा सोचकर कहा,