काली गाडी का इंजन एक बहरे जानवर की तरह गरज रहा था, जो उस अँधेरी, घुमावदार बडी सडक को चीरते हुए आगे बढ रही थी. गति मापक की सुई खतरनाक तरीके से ऊपर चढ रही थी, पर रेयांश खन्ना को इस बात की कोई परवाह नहीं थी. स्टीयरिंग व्हील पर उसके हाथ की उँगलियाँ सफेद पड चुकी थीं और गुस्से के मारे उसकी जबडा इतनी सख्त थी कि उसकी गर्दन की नसें साफ फूल रही थीं. उसका पूरा ध्यान सामने खाली सडक पर था, और उसकी आँखों में एक ऐसी बेरहमी और नफरत थी जो किसी को भी खौफ से