चिड़िया और पायल

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छोटे से शहर के बीचों-बीच एक राजकीय बालिका इंटर कॉलेज था। कहते हैं अंग्रेजों के जमाने में ये जेल थी। मोटी-मोटी दीवारें, जंग लगे ताले और एक कोना तो आज भी ऐसा था जहाँ कोई नहीं जाता था। उस कोने में एक कमरा था, हमेशा बंद। उसकी टूटी खिड़की के कांच से अंदर झाँको तो एक पुरानी, धूल खाई बस खड़ी दिखती थी।स्कूल के पुराने चपरासी काका कहते - "बिटिया, इस बस को मत देखो। पच्चीस साल पहले ये बस इसी स्कूल की बच्चियों को हरिद्वार टूर पर ले जा रही थी। रास्ते में एक्सीडेंट हो गया। पूरी बस... फिर